कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 28वां दिन है। सरकार ने बातचीत के न्योते की जो चिट्ठी रविवार रात भेजी थी, उस पर किसान बीते 2 दिन में फैसला नहीं ले पाए। मंगलवार को कुंडली बॉर्डर पर पंजाब के किसान नेताओं की मीटिंग हुई, इसके बाद कहा गया कि संयुक्त मोर्चा के सदस्य बुधवार को तय करेंगे कि सरकार से बात करनी है या नहीं।
ब्रिटिश PM को भारत आने से रोकने की अपील करेंगे किसान
किसान नेता कुलवंत संधू ने कहा कि हम ब्रिटेन के सांसदों को लिख रहे हैं कि जब तक केंद्र सरकार किसानों की बात नहीं मानती, तब तक PM बोरिस जॉनसन को भारत आने से रोकें। दूसरी तरफ किसानों की भूख हड़ताल भी जारी है। दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर जहां-जहां प्रदर्शन चल रहा है, वहां रोज 11 किसान 24 घंटे के उपवास पर बैठ रहे हैं।
सरकार का दावा- UP के किसान नेता हमारे साथ
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा, 'उत्तर प्रदेश के कुछ किसान नेता मुझसे मिले। उन्होंने नए कृषि कानूनों को लेकर सरकार का समर्थन किया है। उनका कहना है कि कानूनों में बदलाव नहीं होने चाहिए।'
दुनिया में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 7.83 करोड़ के ज्यादा हो गया। 5 करोड़ 50 लाख से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं। अब तक 17 लाख 22 हजार से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। ये आंकड़े https://ift.tt/2VnYLis के मुताबिक हैं। अमेरिका में कोरोना के नए मामले कम होने के बजाए बढ़ रहे हैं। 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे जो बाइडेन भी इससे वाकिफ हैं। उन्होंने मंगलवार को साफ कहा- आने वाला वक्त बहुत मुश्किल और अंधेरे वाला हो सकता है।
एक हफ्ते में 14% मामले बढ़े
‘द गार्डियन’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 20 दिसंबर को खत्म हुए हफ्ते में 16 लाख नए संक्रमितों की पहचान हुई। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो यह इसके पिछले हफ्ते की तुलना में 14% ज्यादा है। WHO के मुताबिक, किसी एक देश में कोरोना के मामलों में इतनी वृद्धि नहीं देखी गई। सबसे ज्यादा परेशानी कैलिफोर्निया को लेकर है। यहां के अस्पतालों में अब बेड्स कम पड़ गए हैं। यहां एक हफ्ते में करीब पांच लाख नए केस सामने आए।
बाइडेन को भी अहसास
प्रेसिडेंट इलेक्ट जो बाइडेन को भी इस बात का अहसास है कि कोरोना की वजह से हालात किस कदर बिगड़ रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने कोरोना टास्क फोर्स के एडवाइजर डॉक्टर एंथोनी फौसी के साथ मीडिया से बातचीत की। मीडिया को बताया गया कि रिलीफ पैकेज जारी कर दिया गया है और नई सरकार भी सबसे पहले संक्रमण पर काबू करने के उपायों पर विचार करेगी। बाइडेन ने कहा- यह बहुत साधारण सच्चाई है। आने वाला वक्त बहुत मुश्किल है। हमें कोविड के खिलाफ आगे जंग लड़नी है। यह पीछे नहीं छूटी। डॉक्टर फौसी ने भी मंगलवार को वैक्सीनेशन कराया। इसके बाद कहा- मैं चाहता हूं कि लाखों अमेरिकी जल्द इस वैक्सीन को लगवाएं। यह बिल्कुल सुरक्षित है।
फ्रांस ने ब्रिटेन के लिए बॉर्डर खोले
नए स्ट्रेन को लेकर ब्रिटेन पर कई देशों ने ट्रैवल बैन लगाया है। दूसरी तरफ, फ्रांस से उसे कुछ राहत मिली है। फ्रांस ने ब्रिटेन से लगने वाली सीमाएं कुछ शर्तों के साथ खोल दी हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो ब्रिटेन में कुछ जरूरी सामानों की किल्लत शुरू हो सकती थी। ब्रिटेन और फ्रांस की सीमा पर सैकड़ों ट्रक खड़े हैं। इनमें कई यूरोपीय देशों से आया सामान लोड है। क्रिसमस के चलते ब्रिटेन ही नहीं बल्कि पूरे यूरोप में लोग खरीदारी कर रहे हैं। लिहाजा, ब्रिटेन पर ट्रैवल और ट्रांसपोर्टेशन बैन भारी पड़ सकता था। ट्रक ड्राइवरों को दो टेस्ट से गुजरना होगा। इसके बाद ही वो ब्रिटेन की सीमा में एंट्री कर पाएंगे।
मंगलवार को ब्रिटेन-फ्रांस सीमा पर पार्क ट्रक। फ्रांस ने ब्रिटेन जाने वाले ट्रकों को मंजूरी दे दी है। ब्रिटेन की सरकार ने इसके लिए अपील की थी।
चीन में फिर 15 केस
चीन में 22 दिसंबर को 15 नए केस सामने आए। इसके पहले यानी सोमवार 21 दिसंबर को भी यहां इतने ही मामले सामने आए थे। अब चीन के हेल्थ डिपार्टमेंट ने कहा है कि वो यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं कोई नया क्लस्टर तो नहीं बन रहा। ज्यादातर मामले एक ही जगह सामने आए हैं और हमेशा की तरह चीन ने यह नहीं बताया कि ये मामले किस राज्य या क्षेत्र के हैं।
from Dainik Bhaskar /national/news/dainik-bhaskar-daily-special-cartoon-only-the-photographer-can-tell-the-governments-address-what-should-the-poor-officers-know-128042838.html
कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 28वां दिन है। सरकार ने बातचीत के न्योते की जो चिट्ठी रविवार रात भेजी थी, उस पर किसान बीते 2 दिन में फैसला नहीं ले पाए। मंगलवार को कुंडली बॉर्डर पर पंजाब के किसान नेताओं की मीटिंग हुई, इसके बाद कहा गया कि संयुक्त मोर्चा के सदस्य बुधवार को तय करेंगे कि सरकार से बात करनी है या नहीं।
ब्रिटिश PM को भारत आने से रोकने की अपील करेंगे किसान
किसान नेता कुलवंत संधू ने कहा कि हम ब्रिटेन के सांसदों को लिख रहे हैं कि जब तक केंद्र सरकार किसानों की बात नहीं मानती, तब तक PM बोरिस जॉनसन को भारत आने से रोकें। दूसरी तरफ किसानों की भूख हड़ताल भी जारी है। दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर जहां-जहां प्रदर्शन चल रहा है, वहां रोज 11 किसान 24 घंटे के उपवास पर बैठ रहे हैं।
सरकार का दावा- UP के किसान नेता हमारे साथ
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा, 'उत्तर प्रदेश के कुछ किसान नेता मुझसे मिले। उन्होंने नए कृषि कानूनों को लेकर सरकार का समर्थन किया है। उनका कहना है कि कानूनों में बदलाव नहीं होने चाहिए।'
from Dainik Bhaskar /national/news/farmers-protest-kisan-andolan-delhi-burari-live-updates-haryana-punjab-delhi-chalo-march-latest-news-today-23-december-128042831.html
भीषण ठंड के बाद बिहार में फिर दो दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के इंदौर में 10 साल बाद तीन रातों से तापमान लगातार 9 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है। वहीं राजस्थान के जयपुर में तापमान 2.2 डिग्री बढ़ गया है, हालांकि दिन के पारे में 1.8 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। पंजाब की राजधानी जालंधर की रातें सबसे ठंडी रहीं। यहां न्यूनतम पारा 2.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।
मध्यप्रदेश के तीन शहरों में रात का पारा 6 डिग्री
इंदौर शहर में एक दशक में ऐसा पहली बार हुआ है, जब लगातार तीन रात न्यूनतम तापमान 9 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है। हालांकि भोपाल, ग्वालियर के मुकाबले इंदौर का तापमान कुछ ज्यादा रहा। भोपाल, सीहोर, शाजापुर में लगातार तीन रात से पारा 6 डिग्री रिकॉर्ड हो रहा है। मौसम वैज्ञानिक भी इसकी पड़ताल में लगे हैं कि इतनी कम दूरी में भी तापमान में 3 डिग्री का अंतर कैसे है। एक वजह यह भी मानी जा रही है कि गुजरात की तरफ हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात होने के कारण ठंड पर आंशिक असर हो रहा है।
मध्यप्रदेश के श्योपुर में नदी में घड़ियालों की संख्या दिन ब दिन बढ़ते जा रही है, मंगलवार को नदी में 100 घड़ियालों के बच्चे छोड़े गए।
राजस्थान में दिन और रात के पारे में घटता जा रहा अंतर
मौसम में आए बदलाव के बाद राजधानी जयपुर में शीतलहर का असर कम रहा। इससे लोगों को सर्द हवाओं से राहत मिली। शीतलहर नहीं चलने के कारण रात के पारे में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं जयपुर में छाए बादलों के चलते दिन के तापमान में कमी आई। सूरज बादलों की ओट में छुपा रहा। इस कारण यहां तेज धूप नहीं खिल सकी। इससे तापमान में भी बढ़ोतरी नहीं हुई। यहां रात का पारा 2.2 डिग्री सेल्सियस उछल गया, जबकि दिन के पारे में 1.8 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई।
राजस्थान के माउंट आबू में ठंड के चलते पत्तों में बर्फ जम गई।
गया बिहार का सबसे ठंडा शहर, यहां तापमान 4.2 डिग्री
भीषण ठंड के बाद बिहार में फिर दो दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसका मतलब है कि अभी भीषण ठंड से राज्य को राहत नहीं मिलने वाली है। सभी जिलों का न्यूनतम तापमान भी लगातार तीसरे दिन 10 डिग्री सेल्सियस के नीचे बना हुआ है। इससे गलन महसूस हो रही है। इस हफ्ते ठंड में कमी होती नहीं दिख रही है। गया लगातार सबसे ठंडा शहर बना हुआ है। मंगलवार को भी गया का तापमान 4.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और यह सबसे ठंडा शहर रहा। शीतलहर के कारण पटना, मुजफ्फरपुर और छपरा में कोल्ड डे की स्थिति बनी हुई है।
पटना के गांधी मैदान में सेना भर्ती के लिए सुबह के समय दौड़ लगाते युवा।
पंजाब में धुंध से बढ़ी ठंड, शिमला से ज्यादा सर्द हुईं रातें
रात और सुबह के समय कई जिलों में पड़ रही घनी धुंध के कारण सर्दी बढ़ गई है। विजिबिलिटी कई जगह 100 मीटर से भी कम रही। मौसम विभाग के मुताबिक 25 दिसंबर तक ऐसा ही मौसम बना रहेगा। वहीं, रात का पारा फिर से गिरना शुरू हो गया है। जालंधर की रातें सबसे ठंडी रही, यहां न्यूनतम पारा 2.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। हिमाचल के शिमला में 6.9 डिग्री न्यूनतम पारा रहा, जबकि सूबे में कई जिलों में 3 से 5 डिग्री के करीब न्यूनतम पारा रिकॉर्ड किया गया।
राजस्थान के श्रीगंगानगर में सुबह के समय खेतों में घूमती नील गायें।
from Dainik Bhaskar /national/news/orange-alert-of-cold-in-jalandhar-bihar-colder-than-shimla-nightfall-in-6-cities-of-mp-6-degrees-128042826.html
कोरोना और ठंड का समय चल रहा है। यह समय हेल्थ को लेकर सतर्कता रखने का है। इस समय सीजनल बीमारी का खतरा भी ज्यादा रहता है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। अगर बच्चों में सर्दी-खांसी और हाई डिग्री बुखार की शिकायत है, तो उसे नजरअंदाज न करें। हालांकि, यह प्रॉब्लम बहुत ज्यादा दिन तक नहीं रहती, लेकिन इसी के कुछ संक्रमण बच्चों को लंबे समय तक परेशान कर सकते हैं। इन्ही प्रॉब्लम में एक रूमैटिक फीवर है।
भोपाल के डॉ. तेजप्रताप तोमर बताते हैं कि यह बीमारी बच्चों में होती है। यह उनके इम्युन सिस्टम पर असर डालती है। इससे उनका शारीरिक, मानसिक विकास रुक जाता है। यदि सही से ट्रीटमेंट नहीं मिल पाता है, तो आगे जाकर प्रॉब्लम खड़ी कर सकता है। आइए जानते हैं कि यह रूमैटिक फीवर क्या होता है? इसके लक्षण क्या हैं?
रूमैटिक फीवर क्या है?
डॉ. तेजप्रताप तोमर के मुताबिक, रूमैटिक फीवर एक इंफ्लैमेटरी बीमारी है। इसकी वजह से होने वाले इन्फेक्शन को गले का इन्फेक्शन या स्कारलेट फीवर कहा जाता है। अगर इसका समय पर ट्रीटमेंट नहीं किया जाता है, तो रूमैटिक फीवर होने के चांस बढ़ जाते हैं। रूमैटिक फीवर की प्रॉब्लम पांच से 15 साल के बच्चों में बहुत कॉमन है। यह प्रॉब्लम स्ट्रेप्टोकॉकस बैक्टीरिया की वजह से होती है। जो आगे जाकर बेहद खतरनाक रूप ले सकती है। इससे इम्युन सिस्टम पर नकारात्मक असर होता है। जो शरीर के अंदर के टिश्यू को खत्म करने लगते हैं। स्किन इंफैक्ट होने लगती है। हार्ट वाल्व और हार्ट फैलियर के अलावा स्ट्रोक की समस्या हो सकती है। यह आपके मेंटल हेल्थ पर भी असर करती है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रूमैटिक फीवर के लक्षण कई तरह के हो सकते हैं। बीमारी के समय यह बढ़ भी सकते हैं। इसमें गले में खराश, बुखार के अलावा जोड़ों में दर्द रहना, जी मिचलाना जैसी प्रॉब्लम आम है।
किन वजहों से होता है रूमैटिक फीवर?
ग्रुप A स्टेप्टोकॉकस बैक्टीरिया से सबसे पहले गले में इन्फेक्शन होता है। इससे गले में खराश होने लगती है। इसके बाद शरीर में फीवर रहने लगता है। ग्रुप A स्ट्रेप्टोकॉकस बैक्टीरिया स्किन और शरीर को नुकसान पहुंचाता है। इस बैक्टीरिया में एक प्रोटीन होता है। इस तरह के प्रोटीन शरीर के टिश्यूज में भी पाया जाता है। इस वजह से इम्युन सिस्टम सेल बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम है।
रूमैटिक फीवर के जोखिम क्या हैं?
अगर रूमैटिक फीवर के जोखिम पर नजर डालें तो इसके कई फैक्टर हैं। फैमिली हिस्ट्री इसका एक बहुत बड़ा फैक्टर है। जीन्स की भी वजह से भी यह बीमारी हो सकती है। स्ट्रेप्टोकॉकस बैक्टीरिया के कुछ स्ट्रेन की वजह से भी यह प्रॉब्लम बढ़ जाती है। इसका इनवायरमेंट से भी कनेक्शन है। साफ-सफाई न रखना, पीने का पानी साफ न होना और भीड़ के इलाकों में रहना भी इसके रिस्क फैक्टर बढ़ाने में मदद करते है।
यह तीन टेस्ट जरूरी
1. ब्लड टेस्ट कराएं
अगर इसके लक्षण नजर आने लगें तो हमें सबसे पहले ब्लड टेस्ट कराना चाहिए। अगर इसमें स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया का पता चल जाता है तो डॉक्टर आगे किसी भी तरह के टेस्ट के लिए नहीं कहेंगे। सी-रिएक्टिव प्रोटीन और एरिथ्रोसाइट सेडीमेंट्रेशन रेट के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट करते हैं।
2. ECG या EKG कराएं
इसका मतलब होता है, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी टेस्ट, इसे ECG या EKG भी कहा जाता है। इसमें इलेक्ट्रिक सिग्नल्स की मदद से हार्टबीट को रिकॉर्ड किया जाता है। इसमें डॉक्टर इसके सिग्नल पैटर्न को देखते हैं, जो हार्ट में आई स्वलिंग की जानकारी देती है।
3. इको-कार्डियोग्राम टेस्ट कराएं
हार्ट की लाइव एक्शन इमेज को दिखाने के लिए साउंड वेव को यूज किया जाता है। इसमें हार्ट से जुड़ी प्रॉब्लम का पता लगाया जाता है।
इसके इलाज के तरीके क्या हो सकते हैं?
1. पेनिसिलिन या एंटीबायोटिक
इसके इलाज के लिए डॉक्टर पेनिसिलिन या एंटीबायोटिक लिखते हैं। इसके बाद डॉक्टर गठिया के बुखार का इलाज करने के लिए एक तरह का एंटीबायोटिक ट्रीटमेंट भी शुरू कर सकता है। इसके अलावा जिनके हार्ट में स्वलिंग होती है, उन्हें डॉक्टर 10 साल या उससे अधिक समय तक एंटीबायोटिक ट्रीटमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं।
2. एंटी इंफ्लैमेटरी ट्रीटमेंट
डॉक्टर स्वलिंग, फीवर और दर्द को कम करने के लिए पेनकिलर दे सकते हैं। ये एंटी इंफ्लैमेटरी ट्रीटमेंट में आ सकते हैं। ट्रीटमेंट डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही कराएं।
क्या हो रहा है वायरल : सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि उद्योगपति अदाणी के अनाज भंडारण से जुड़ी खबर उजागर करने वाले पत्रकार पर जानलेवा हमला हुआ है। दावे के साथ एक फोटो भी शेयर की जा रही है। फोटो में एक अस्पताल में भर्ती एक शख्स दिख रहा है। घायल पत्रकार का नाम आकर्षण उप्पल बताया जा रहा है।
करनाल:-क़ानून से पहले अडाणी के गोदाम तैयार है, ये सच उजागर करने वाले खोजी पत्रकार पर जानलेवा हमला! pic.twitter.com/LSd0cYCpsK
दावे से जुड़े की-वर्ड सर्च करने पर हमें IBN24 की एक रिपोर्ट मिली। जिससे पता चलता है कि हरियाणा में आकर्षण उप्पल नाम के पत्रकार पर जानलेवा हमला हुआ था। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी हमले में घायल हुए पत्रकार उप्पल को देखने अस्पताल पहुंचे थे।
45 सेकंड का वीडियो गुजरने के बाद वही फोटो सामने आती है, जिसे सोशल मीडिया पर अदाणी से जोड़कर शेयर किया जा रहा है। साफ है कि पत्रकार पर हमले का ये मामला हरियाणा का है।
पड़ताल के अगले चरण में हमने पत्रकार पर हमले की वजह पता लगाना शुरू की। द वायर वेबसाइट पर हमें एक रिपोर्ट मिली। इससे पता चलता है कि पत्रकार उप्पल पर ड्रग से जुड़ा मामला कवर करने के बाद हमला हुआ था।
इसी सप्ताह ड्रग से जुड़ा एक मामला कवर करने के बाद आकर्षण उप्पल और उनके परिवार के पास धमकी भरे फोन कॉल आने शुरु हो गए थे। ये कथित धमकियां ड्रग मामले में गिरफ्तार हुए आरोपी गुरमीत सिंह के भाई घेलू की तरफ से दी जा रही थीं।
धमकियों के बाद पत्रकार उप्पल पर पांच लोगों ने लाठियों से हमला किया। जिसमें वे बुरी तरह घायल हो गए। फिलहाल पत्रकार अस्पताल में है और उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। सभी 5 आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है।
इन सबसे साफ है कि पत्रकार पर हुए हमले का उद्योगपति अदाणी और उनके वेयरहाउस से कोई संबंध नहीं है। सोशल मीडिया पर ड्रग मामले को कवर करने वाले पत्रकार पर हमले की घटना को गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।
1. हर बोल, हर शब्द की कीमत है। कई बार शब्दों के चुनाव बोल का अर्थ बदल देते हैं। तभी तो तोल-मोलकर बोलने की बात कही गई है। सही शब्द का सही उपयोग अच्छी समझ और संवेदनशीलता को ही नहीं, समानुभूति पूर्ण रवैए को भी ज़ाहिर करता है। इन्हें उदाहरण के साथ इस लेख में जानिए ...
2. अगर हम कोशिश करें, तो लोगों का नजरिया और विचार दोनों बदल सकते हैं। और छोटे-छोटे कदम भी गर सही राह पर पड़ें, तो बड़ी मंजिलों तक पहुंचा सकते हैं। जानें इस लेख में ...
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15. डाकपे एप रुपये भेजने, क्यूआर कोड को स्कैन करके सेवाओं का भुगतान और दुकानों पर डिजिटल ढंग से भुगतान करने जैसी कई सुविधाएं देगा। इसके अलावा और क्या है इसमें ख़ास? जानने के लिए पढ़िए ये लेख...
17. सुबह जल्दी उठना हमेशा अच्छा माना जाता है। जल्दी उठने से सेहतमंद रहने में तो मदद मिलती ही है, साथ ही भागादौड़ी नहीं होती, मन प्रसन्न रहता है। इसके अलावा और क्या-क्या फायदे होते हैं। पढ़िए इस लेख में...
22. जब दो अलग-अलग मिजाज और विचार एक-दूसरे से अलग होते हैं, तो विचारों में मतभेद, आपसी टकराव, पसंद-नापसंद का बेमेल होना रोज़-ब-रोज़ उजागर होने लगता है। इस कारण रिश्ते में कड़वाहट आने लगती है। ऐसे में रिश्ते के बीच तालमेल बैठाने के लिए पढ़ें ये लेख...
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पूर्व प्रधानमंत्रियों की परंपरा को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। नेपाल में पिछले कई साल में किसी प्रधानमंत्री का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ। ओली के दो साल बाकी थे, लेकिन उन्होंने संसद भंग कर नए चुनावों की घोषणा कर दी।
नेपाली संविधान में संसद भंग करने की सुविधा तभी दी गई है जब कोई सरकार अल्पमत में चली जाए, लेकिन ओली ने वह नौबत ही नहीं आने दी। उनकी कम्युनिस्ट पार्टी के 91 सदस्यों ने उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखा तो उन्होंने संसद ही भंग करवा दी। संसद के 275 सदस्य परेशान हैं। दो साल पहले ही ओली ने उन्हें घर बिठा दिया।
नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी वास्तव में दो कम्युनिस्ट पार्टियों से मिलकर बनी है। एक है मार्क्सवादी-लेनिनवादी और दूसरी माओवादी। पहली के नेता हैं ओली और दूसरी के पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’। ये दोनों पार्टियां 2017 में एक हो गईं। पहले उनमें कड़ा मुकाबला होता था। ओली चाहते थे कि प्रचंड के खिलाफ युद्ध अपराध के मुकदमे चलें, लेकिन 2008 में पहले कम्युनिस्ट शासन में प्रचंड ही प्रधानमंत्री बने। 2017 के चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और ओली प्रधानमंत्री बन गए।
ओली और प्रचंड, दोनों ही संयुक्त कम्युनिस्ट पार्टी के सह-अध्यक्ष हैं। पार्टी पर प्रचंड का वर्चस्व है और सरकार पर ओली का। शुरुआत में उम्मीद थी कि दोनों नेता और पार्टियां एक होकर शासन चलाएंगी लेकिन शुरू से ही इतना तनाव था कि सत्तारूढ़ होते ही दोनों खेमों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाने शुरू कर दिए। बतौर विरोधी दल नेपाली कांग्रेस और मधेसी पार्टियां ओली का जितना विरोध करतीं, उससे ज्यादा प्रचंड-खेमा करने लगा।
पार्टी की कार्यकारिणी और पार्टी के संसदीय दल में अक्सर टकराव दिखाई देने लगा। सबसे पहले तो यही मांग उठी कि ओली यदि प्रधानमंत्री बने रहना चाहते हैं तो पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ें। फिर उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे। अमेरिकी मदद से बनने वाली 50 करोड़ रु. की सड़क पर सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने ही सवाल उठा दिए। ओली पर भारतपरस्ती का इल्जाम लगाया गया। यह खुलेआम पार्टी मंचों से कहा गया कि नेपाल के लिपुलेख-कालापानी क्षेत्र में भारत सड़क बना रहा है और ओली ने मुंह पर पट्टी बांध रखी है।
कोरोना-काल में सरकारी लापरवाही और चिकित्सा भ्रष्टाचार के मामले भी उजागर किए गए। सरकार और पार्टी के बीच संवाद के कई आयोजन निरर्थक रहे। कई बैठकों में ओली गए ही नहीं। इस बीच चीन की महिला राजदूत हाऊ यांकी ने जबरदस्त सक्रियता दिखाई। दोनों खेमों के झगड़े में वे कभी मध्यस्थ और कभी सरपंच की भूमिका में रहीं। चीन के नेता भी काठमांडू के चक्कर लगाने लगे।
ओली भी कई पैंतरे दिखाने लगे। उन्होंने साफ़-साफ़ कह दिया कि वे पांच साल राज करेंगे। उन्होंने प्रचंड के नहले पर दहला मार दिया। उन्होंने लिपुलेख-कालापानी के मामले में भारत के विरुद्ध आनन-फानन में अभियान छेड़ दिया और संसद में प्रस्ताव रखकर, उस क्षेत्र को नेपाल की सीमा में दिखाकर नया नक्शा जारी कर दिया। विरोधी दलों को भी इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित करना पड़ा।
पड़ोसी देशों में जब भी कोई नेता संकट में फंसता है तो वह भारत-विरोध का ब्रह्मास्त्र चला देता है। ओली ने यही किया। 2015 की सीमा बंदी के वक्त भारत के कड़े विरोध ने ही उन्हें बड़ा नेता बनाया था। उन्होंने पहले ही पहल कर दी थी कि संसद में हिंदी बोलने और धोती-कुर्ता पहनने पर प्रतिबंध लगे।
अब से लगभग 30 साल पहले मैंने संसद-अध्यक्ष दमन प्रसाद घुंमा ढुंगाना और गजेंद्र बाबू से कहकर यह अनुमति दिलवाई थी। ओली ने अपनी ‘राष्ट्रवादी’ छवि चमकाने के लिए अब ऐसा प्रावधान भी कर दिया कि नेपालियों से शादी करने वाले भारतीय नागरिकों को अब नेपाली नागरिकता लेने के लिए सात साल इंतजार करना पड़ेगा।
इधर भारत सरकार का कड़ा रुख देखकर ओली ने भारत को भी पटाना शुरू कर दिया था। कुछ दिन पहले भारत के विदेश सचिव और सेनापति से काठमांडू में काफी चिकनी-चुपड़ी बातें भी हुई हैं लेकिन भारत का रवैया तटस्थ ही है। भारत के लिए जैसे प्रचंड, वैसे ही ओली। ये दोनों सत्तारूढ़ हुए तब और उसके पहले भी इन दोनों से मेरी काठमांडू और दिल्ली में खूब बातचीत हुई है। दोनों में खास फर्क नहीं है। पांच-छह महीने बाद जो भी जीतेगा, भारत उसके साथ सहज संबंध बनाने की कोशिश करेगा।
नेपाल और भारत के संबंध नाभि-नाल की तरह हैं। दुनिया के किन्ही भी दो देशों के संबंध इतने गहरे नहीं हैं। भारत-नेपाल सीमा लगभग 1800 किमी की है। मुश्किल से दो स्थान सुपरिभाषित नहीं हैं। दोनों देशों में आवागमन और व्यापार मुक्त है। नेपाल के लगभग 80 लाख लोग भारत में रहते हैं। भारत की फौज में सात गोरखा रेजिमेंट और 60 हजार नेपाली सैनिक हैं। नेपाल की सरकार अब उसे चाहे ‘हिंदू राष्ट्र’ न कहे लेकिन नेपाल क्या है, यह सभी को पता है। चीन जो कर ले, भारत-नेपाल संबंध अटल हैं।
ये उन दिनों की बात है जब अंग्रेजों का बोलबाला था और राजा-महाराजा भी हुआ करते थे। दोनों का एक कॉमन शौक था, शिकार पर जाना। तेंदुआ और बाघ का शिकार तो सभी करते थे, मगर शेर सिर्फ एक रियासत में मौजूद था, जूनागढ़। और वहां के नवाब महाबत खान इस प्राणी को मारने की बजाय उसकी रक्षा करने में लगे हुए थे।
अगर वायसरॉय या गवर्नर कहे कि मैं शिकार करना चाहता हूं तो उसे मना करना बड़ा मुश्किल था। इसलिए साल में चार से छह का कोटा तो रखना पड़ा। मगर उससे ज्यादा बिल्कुल नहीं। महाबत खान दूसरे राजा-महाराजाओं के साथ ज्यादा मिलते-जुलते नहीं थे। कोई दोस्ती के नाम पर ये न मांग ले कि हमें भी दीजिए शेर मारने का मौका।
खैर, 1947 में जब देश का बंटवारा हुआ, महाबत खान अपने दीवान शाह नवाज भुट्टो की बातों में आ गए। उन्होंने पाकिस्तान जाने का फैसला लिया। जब वो कराची की तरफ निकले, तो हवाईजहाज गिर जंगल के ऊपर से गुजरा और नवाब रो पड़े। ‘अब मेरे शेरों की रक्षा कौन करेगा?’ और उनका सवाल जायज था।
आजादी होते ही, आम जनता हर जंगल और उसके पशु-प्राणियों के ऊपर टूट पड़ी। दस-बारह साल के अंदर लाखों पेड़ काट दिए गए और वहां खेती होने लगी। जैसे-जैसे जंगल घटा, जानवरों के खाने-पीने के साधन घटे। शिकार अब कमर्शियल स्केल पर होने लगा और महाराज क्लास के लिए, पैसे कमाने का साधन।
कहते हैं कि सौ साल पहले इस देश में टाइगर की जनसंख्या 58 हजार थी। फिर 1970 दशक में महज 2000 प्राणी बच पाए थे। और वो भी शायद सृष्टि से गायब हो जाते, अगर उस वक्त हम न जागे होते। इस जागृति में बहुत बड़ा हाथ था फॉरेस्ट सर्विस ऑफिसर कैलाश सांखला का। जोधपुर में जन्मे कैलाश को देश का सबसे पहला वन्यजीव संरक्षक कहा जा सकता है।
कैलाश सांखला ने भी 1953 में एक टाइगर को अपनी राइफल से मारा था। मगर वो उनके जीवन का एक टर्निंग पॉइंट बन गया। मरते हुए जानवर की आंखों में जो पीड़ा थी, उसे देखकर कैलाश हिल गए। उस दिन के बाद से जीवन के अंत तक, इन शानदार प्राणियों को बचाने के अभियान में वो जुटे रहे।
ये काम आसान नहीं था, सालों तक उनकी किसी ने एक न सुनी। फिर 1965 में जब कैलाश सांखला को दिल्ली चिड़ियाघर का डायरेक्टर बनाया गया, तब उन्हें एक मौका मिला। जानवरों के रहन-सहन में उन्होंने बदलाव किया, ताकि चिड़ियाघर में होते हुए भी उन्हें नैचुरल हैबिटेट का अहसास हो। साथ-साथ वो टाइगर के सिलसिले में गहरी रिसर्च करने लगे।
उनकी मदद से 1967 में चीते व बाघ की खाल का कारोबार अखबारों में एक्सपोज हुआ। ये खुलेआम दिल्ली के बाजारों में बिक रही थी। इस वजह से 1970 में प्राणियों की खाल व हडि्डयों का एक्सपोर्ट भारत से बंद हुआ। अगले दो साल तक कैलाश सांखला ने देशभर में घूमकर स्टडी की कि आखिर कितने टाइगर अब भी जिंदा हैं। उनके इस अभियान में साथ दिया प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने। काफी विरोध के बावजूद 1972 में संसद में वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट पास हुआ। जंगली प्राणियों का शिकार बैन हुआ, सरकार को वाइल्डलाइफ सेंचुरी बनाने का हक मिला। बाघ की रक्षा के लिए एक ‘टाइगर टास्क फोर्स’ बना और वहां से जन्मा ‘प्रोजेक्ट टाइगर’।
कैलाश सांखला इस अभियान के पहले डायरेक्टर बने। उनका बखूबी साथ दिया आईएएस अफसर एमके रणजीतसिंह ने, जो खुद एक जमाने में शिकार करने वाली रॉयल फैमिली से थे। 1973 में नौ ‘टाइगर रिजर्व’ स्थापित किए गए, ताकि बाघ नैचुरल हैबिटेट में फल-फूल सकें। वन में स्थित गांववालों को रीलोकेट किया गया, ताकि जानवर और मनुष्य के बीच झड़प कम हो।
आज प्रोजेक्ट टाइगर को विश्वभर में बड़ी सक्सेस माना जाता है। हालांकि, आज भी समस्याएं पूरी तरह हल नहीं हुईं। मगर दुनिया के 75% से अधिक टाइगर आज भी हमारे देश के नागरिक हैं। प्राचीन काल में मनुष्य जानवर को देवता रूप में पूजते थे। आज इन तेजस्वी प्राणियों को हम जीप सफारी से देखते हैं, अपने कैमरा के लेंस से। आदर और प्रेम की भावना से उनके सामने नतमस्तक होंं। तभी आप इंसान कहलाने के लायक हैं।
कृषि कानूनों का मसला इतना लंबा खिंच गया कि इतने समय में तो किसानों की एक फसल कटकर मंडियों में आ जाती। जून में कृषि सुधार के लिए अध्यादेश लाए गए थे। कानून बनने से लेकर अब तक इस पर विवाद की ऐसी फसल खड़ी हो गई है कि बात अब ‘बॉर्डर’ पर प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पर देखी जाने लगी है। दोनों ओर से नरमी तो पूरी दिख रही है, लेकिन दोनों पक्ष पास होकर भी दूर-दूर हैं। बात सिरे तभी चढ़ेगी, जब दिल मिलेंगे।
किसानों की भलाई के लिए पीछे हटना कोई दुश्मन को पीठ दिखाना नहीं है। चाहे सरकार का नेतृत्व करने वाले हों या किसानों का, दोनों के लिए ही यह परीक्षा की घड़ी है। ऐसे आंदोलन नजीर बन जाते हैं और बरसों-बरस उनकी समीक्षा होती रहती है। जो आंदोलन सिर्फ हार-जीत की दृष्टि से चलाए गए या देखे गए उनको हमेशा विवादित ही माना गया। इस आंदोलन में भले किसान जिद पर अड़ा है, परंतु उसने दिल भी जीते हैं। बॉर्डर की जब भी बात आती है तो दुश्मन जैसे ख्याल आते हैं। सिंघु और टिकरी हमारे आंतरिक बॉर्डर हैं।
ऐसे बॉर्डर जिनकी सीमाएं मिलती रहना बेहद जरूरी हैं, तभी तो हम बाहरी बॉर्डर पर मजबूती से खड़े रहेंगे। इस मजबूती में अन्नदाता का बहुत बड़ा योगदान है। जब देश के सामने पेट भरने के लिए अन्न का संकट था, तब सत्ता के आह्वान पर देशवासियों ने एक दिन का उपवास किया था। तब से लेकर आज तक किसान ने इस देश में अन्न की कमी नहीं होने दी।
आज किसान दिवस है। सरकार हो या संगठन सभी को सिर्फ किसान बनकर सोचना चाहिए कि सिर्फ बातचीत को लंबा खींचकर ऐसे आंदोलन को थकाऊ नहीं बनाया जा सकता। जिस तरह किसान फसल के लिए पहले जमीन तैयार करता है, फिर खाद-बीज देता है और तमाम प्राकृतिक आपदाओं से बचाकर फसल तैयार करता है, उसी तरह सरकार ने इन सुधारों के लिए जमीन तैयार की होती तो अब तक फसल पककर तैयार हो जाती। कहीं न कहीं सरकार से यह चूक तो हुई ही है कि जिनकी भलाई वह करने जा रही है, उनके मन की बात सही समय पर नहीं सुनी गई। आज अच्छा मुहूर्त है।
ऐसे शख्स का जन्मदिवस है, जो किसान से प्रधानमंत्री बने और प्रधानमंत्री बनकर भी किसान ही रहे। किसान भी भली-भांति यह जानते हैं कि चौधरी चरणसिंह की जयंती को किसान दिवस भाजपाई प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ही घोषित किया था। इसलिए अविश्वास का यह कुहासा अब छंटना चाहिए। फिर सुलह के बाद भी यदि कोई सरकार मुकरती है तो न तो काेई सरकार स्थायी है और न ही यह आंदोलन आखिरी। व्यवस्था का न्यायप्रिय होना जरूरी है और न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए।
सरकार को चाहिए कि किसानों के विश्वास में कोई कमी नहीं आने दे। एक दिन का किसान बनकर पहले भाईचारे की जमीन को मजबूत करे, फिर सौहार्द के बीज बोए, भरोसे के पानी से सिंचाई करे और आपदा में उसके विश्वास की भरपाई करे। उसके बाद जनकल्याण की जो खेती होगी, उससे केवल देश का पेट ही नहीं भरेगा, किसानों का पेटा (संतुष्टि) भी भरेगा और देश का खजाना भी। चलो आज एक बार...किसान बन जाएं!
(जाेगेंद्र शर्मा). साल 2020 जैसा दौर न तो पिछले कई दशकों में किसी ने देखा और न ही कोई देखना चाहता है। कोरोना काल में राज्य में अचानक सुसाइड के केस में भी काफी तेजी आई। इसके पीछे चिंता को सबसे बड़ा कारण माना गया। इसको लेकर हिमाचल प्रदेश मेंटल हेल्थ अथॉरिटी ने शिमला, चंबा और मंडी में लोगों की सोच को लेकर एक सर्वे करवाया।
सर्वे में 5188 लोगों से बातचीत की गई जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए। जब उनसे पूछा गया कि क्या इस दौर में उन्होंने आत्मघाती कदम उठाने के बारे में सोचा। तो 8.04 % यानी 417 लोगों ने कहा कि वे खुद को खत्म करने की कोशिश कर चुके हैं।
वहीं 2.42% लोगों ने कहा कि वे भी ऐसा सोचते हैं। सर्वे में लोग सबसे ज्यादा चिंतित परिवार को लेकर दिखे। 42.92% लाेगों ने कहा कि वे अपने परिवार की काफी चिंता करते हैं। इनमें भी 31.78% लोग 26 से लेकर 60 साल तक के हैं। 30.36% गांव में रहने वाले लाेग इस तरह की चिंता कर रहे हैं, जबकि 12.57 फीसदी शहर के लाेग हैं। साेशल मीडिया के संदेशाें से भी लाेग तनाव में हैं।
अपनों से दूर होने के डर ने भी लोगों को चिंता में डाला: पाठक
सर्वे ने हमें भी चाैंका दिया। लाेग सीधे कह रहे हैं कि हमने सुसाइड की काेशिश की थी। नौकरी जाने से लोग अवसाद में चले गए। कुछ लाेग इमाेशनल एक्सचेंज के चलते भी परेशान हुए हैं। एकदम से लाेग अपनाें से दूर हो गए जिसने उन्हें चिंतित कर दिया।-डाॅ. संजय पाठक, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, एचपी स्टेट मेंटल हेल्थ अथाॅरिटी
ये सवाल पूछे गए
क्या आप दाे हफ्ताें में काेविड से संक्रमित के विचार से ग्रस्त हुए।
23.87 % ने जवाब हां में दिया। 12.63 % पाेस्ट ग्रेजुएट, 7.48% ग्रेजुएट ने हां में जवाब दिया।
from Dainik Bhaskar /national/news/8-attempted-suicide-25-made-up-their-mind-to-do-so-128042802.html
ओडिशा के पुरी स्थित भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर 9 महीने बाद आज से भक्तों के लिए खुलेगा। बाहरी लोगों को 3 जनवरी से दर्शन की इजाजत मिलेगी। इस दौरान रोज 5000 भक्त ही दर्शन कर पाएंगे। मंदिर प्रशासक समिति और जिला प्रशासन की तरफ से कोविड के नियमों के मुताबिक, बाहर से आए भक्त टेस्ट के बाद ही मंदिर में जा पाएंगे।
यह पहली बार है कि यहां 23 दिसंबर से तीन दिन मंदिर के सेवक पंडा (पुजारी) और उनके परिवार के सदस्य ही मंदिर में जा सकेंगे। इसके अगले 6 दिन सिर्फ पुरी नगर निगम क्षेत्र के लोगों को अनुमति मिलेगी। अलग-अलग वार्ड के लोग अलग दिन और समय पर अंदर जाकर दर्शन कर पाएंगे।
मार्च से बंद है मंदिर
श्री जगन्नाथ मंदिर मार्च में लॉकडाउन लगने के बाद 25 मार्च से बंद है। श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के प्रभारी जनसंपर्क अधिकारी जितेंद्र मोहंती ने बताया कि बुधवार से मंदिर दर्शन के लिए खोला जा रहा है। अभी भीड़ न लगे इसके लिए कैटेगरी बांटते हुए अलग-अलग लोगों को अलग-अलग दिन मंदिर प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। पहले दिन यहां मंदिर से जुड़े सेवक पंडा जिनकी संख्या करीब 2500 है, उन्हें व उनके परिवार वालों को 23 से 25 दिसंबर तक भगवान के दर्शन की अनुमति दी गई है।
इसके बाद 26 से 31 दिसंबर तक पुरी के 32 वार्ड में रहने वाले लोगों को ही दर्शन की अनुमति दी गई है। 1 और 2 जनवरी को मंदिर बंद रहेगा। इसके बाद 3 जनवरी से पुरी से बाहर के लोग भी मंदिर में प्रवेश कर पाएंगे। इसके लिए उन्हें कोरोना टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट अपने पास रखनी होगी। यह रिपोर्ट 48 घंटे से ज्यादा पुरानी नहीं होनी चाहिए।
सुबह 7.30 से रात 9 तक दर्शन
जनसंपर्क अधिकारी मोहंती ने बताया कि यह तय किया गया है कि 26 दिसंबर को सुबह 7.30 से 11.30 बजे तक वार्ड 6 व 9 के रहवासी, दोपहर 12 से 4 बजे तक वार्ड 12 व 15 के रहवासी और शाम 4.30 बजे से रात 9 बजे तक वार्ड 11, 2 व 3 के रहवासी अपने आधार कार्ड के साथ दर्शन के आएंगे। इसी के अनुसार अलग-अलग वार्ड के लोग अलग-अलग दिन व समय स्लॉट में भगवान का दर्शन करने मंदिर आ पाएंगे।
from Dainik Bhaskar /local/chhattisgarh/news/outsiders-will-be-able-to-visit-from-january-3-entry-will-be-given-only-after-the-corona-test-128042787.html
ब्रिटेन में कोरोना में नया म्यूटेशन मिला है। ये काफी तेजी से लोगों को संक्रमित करता है। राहत की बात ये है कि भारत में अब तक इस म्यूटेटेड कोरोना का कोई केस नहीं मिला है। ना ही इसका असर भारत में कोरोना वैक्सीन की प्रॉसेस पर पड़ेगा। केंद्र सरकार ने यह बात बताई है। फिलहाल शुरू करते हैं मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ...
सबसे पहले देखते हैं, बाजार क्या कह रहा है
BSE का मार्केट कैप 180.80 लाख करोड़ रुपए रहा, BSE पर करीब 50% कंपनियों के शेयरों में बढ़त रही।
3,092 कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग हुई। इसमें 1,569 कंपनियों के शेयर बढ़े और 1,352 कंपनियों के शेयर गिरे।
आज इन इवेंट्स पर रहेगी नजर
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मोदी कैबिनेट की मीटिंग होगी। सुरक्षा और आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटियों की भी बैठक होनी है।
गृह मंत्री अमित शाह असम जा सकते हैं। यहां उनकी मौजूदगी में कई कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
देश-विदेश
मुंबई में कोरोना के दौरान रात 2 बजे पार्टी, रैना, रंधावा और सुजैन अरेस्ट
मुंबई में एयरपोर्ट के पास रात 2 बजे पुलिस ने ड्रैगन फ्लाई क्लब में छापा मारा। पुलिसवाले तब दंग रह गए, जब यहां क्रिकेटर सुरेश रैना, गुरु रंधावा, सुजैन खान जैसी 27 सेलिब्रिटीज जश्न मनाती दिखीं। 34 लोगों को गिरफ्तार किया गया और बाद में छोड़ दिया गया। इन लोगों के खिलाफ कोरोना प्रोटोकॉल और नाइट कर्फ्यू जैसे नियमों को तोड़ने का केस दर्ज किया गया। पार्टी के दौरान रैपर बादशाह भी मौजूद थे, लेकिन वो पिछले दरवाजे से भाग निकले। पूछताछ का नोटिस उन्हें भी भेजा गया है।
फरवरी तक नहीं होंगी CBSE की बोर्ड परीक्षाएं
देश में फरवरी तक CBSE की बोर्ड परीक्षाएं नहीं होंगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं फिलहाल जनवरी-फरवरी में कराने की कोई योजना नहीं है। हालांकि, शिक्षा मंत्री ने यह साफ किया कि परीक्षाएं फरवरी के बाद कराई जाएंगी।
अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में मोदी का सेकुलर संदेश
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के शताब्दी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। मोदी ने कहा कि हम किस मजहब में पले-बढ़े हैं, इससे बड़ी बात ये है कि कैसे हम देश की आकांक्षाओं से जुड़ें। मतभेदों के नाम पर काफी वक्त जाया हो चुका है। अब मिलकर नया आत्मनिर्भर भारत बनाना है। 56 साल में लाल बहादुर शास्त्री के बाद AMU में भाषण देने वाले मोदी दूसरे प्रधानमंत्री हैं।
UK से आने वालों के लिए SOP
कोरोनावायरस का नया रूप सामने आने के बाद भारत ने UK से या वहां से होकर आने वाले लोगों के लिए स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी कर दिया है। इसके लिए मंगलवार रात 12 बजे तक UK से आने वाले लोगों को एयरपोर्ट पर RT-PCR टेस्ट कराना होगा। अगर उनमें कोरोना का नया रूप पाया गया तो सेपरेट आइसोलेशन में रहना होगा।
आज से ब्रिटेन से आने वाली फ्लाइट्स पर रोक
सरकार ने कोरोना में म्यूटेशन के चलते UK से आने वाली फ्लाइट्स पर 23 से 31 दिसंबर तक रोक लगा दी थी। यह रोक 22 दिसंबर रात 11.59 बजे से 31 दिसंबर रात 11.59 बजे तक रहेगी।
अब 24 घंटे बिजली पाने का अधिकार
देशभर के बिजली ग्राहकों को कई अधिकार देने वाले "इलेक्ट्रिसिटी (राइट्स ऑफ कंज्यूमर्स) रूल्स: 2020' को सोमवार को नोटिफाई कर दिया गया। इसमें ग्राहकों को 24 घंटे बिजली पाने का अधिकार भी दिया गया है। अगर बिजली कंपनियां तय वक्त से ज्यादा कटौती करती हैं, तो उन्हें ग्राहकों को मुआवजा देना होगा।
मोदी को अमेरिका का सर्वोच्च मिलिट्री सम्मान
अमेरिका में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च मिलिट्री सम्मान लीजन ऑफ मेरिट (Legion of Merit) से सम्मानित किया गया। मोदी को यह अवॉर्ड भारत-अमेरिका के रणनीतिक रिश्ते बढ़ाने के लिए दिया गया। मोदी की तरफ से यह सम्मान अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने लिया। अमेरिका का यह अवॉर्ड किसी देश या सरकार के प्रमुख को ही दिया जाता है।
भास्कर एक्सप्लेनर
मोदी की "एक्टिविस्ट बहन' की कनाडा में हत्या
बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के हनन को लेकर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली करीमा बलोच कनाडा में मृत पाई गईं। उनकी हत्या की आशंका जताई जा रही है। पुलिस को करीमा का शव टोरंटो के पास हर्बरफ्रंट में मिला। करीमा के पति हम्माल हैदर और भाई ने शव की पहचान की है। आरोप लग रहे हैं कि पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी ISI ने करीमा की हत्या करवाई है। पढ़ें पूरी खबर...
आज की पॉजिटिव खबर
10 रुपए देकर डिप्रेशन के शिकार लोगों की स्टोरी सुनते हैं
पुणे शहर के फरगुसन कॉलेज रोड पर इन दिनों 22 साल का एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट एक प्लेकार्ड लेकर खड़ा रहता है। जिस पर लिखा होता है, ‘आप मुझे अपनी स्टोरी बताइए, मैं आपको 10 रुपए दूंगा।’ गले में इस तरह का प्लेकार्ड देखकर वहां से गुजरने वाले लोगों की निगाहें कुछ सेकंड के लिए उस पर ठहर जाती हैं और कदम खुद-ब-खुद रुक जाते हैं। पढ़ें पूरी खबर...
सुर्खियों में और क्या है...
यूपी की शाहजहांपुर जेल में कैदियों को रेप के आरोपी आसाराम की फोटो लगे कंबल बांटे गए। आसाराम पर इसी शहर की लड़की के साथ रेप करने का आरोप है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को मंगलवार को कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने CM की गाड़ियों पर डंडे बरसाए और काले झंडे दिखाए।
टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली मंगलवार को पैटरनिटी लीव के लिए ऑस्ट्रेलिया से भारत रवाना हो गए। इंडिया अब अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में खेलेगी।
कहानी- नुकसान को लेकर महात्मा गांधी ने एक नई सोच दी थी। गांधीजी छोटी-छोटी बातों में भी बहुत सजग रहते थे। एक बार वे रेल से यात्रा कर रहे थे। किसी स्टेशन पर जब गाड़ी रुकी तो गांधीजी कुछ देर के लिए नीचे उतरे। उस समय वे जहां जाते थे, वहां उनसे मिलने वालों की भीड़ लग जाती थी।
गांधीजी भीड़ के बीच घिरे हुए थे और रेलगाड़ी चल दी। गांधीजी तुरंत भीड़ से बाहर निकले और तेजी से चलते हुए अपने डिब्बे में चढ़ गए। लेकिन, डिब्बे में चढ़ते समय गांधीजी की एक चप्पल नीचे गिरकर पटरियों के बीच में चली गई।
डिब्बे के गेट पर खड़े होकर गांधीजी कुछ सोचने लगे। आसपास के सभी लोग उन्हें देख रहे थे। गांधीजी ने अपनी दूसरी चप्पल भी वहीं गिरा दी। तब किसी ने उनसे पूछा, 'आपने अपनी दूसरी चप्पल भी क्यों गिरा दी?
गांधीजी बोले, 'मेरी एक चप्पल गिर चुकी थी और मेरे एक पैर में चप्पल रह गई थी। मैंने सोचा कि अब जो एक चप्पल मेरे पास है, वह किसी काम की नहीं है और जो चप्पल गिर गई है, वह भी किसी के काम नहीं आएगी। लेकिन, अगर मैं मेरी दूसरी चप्पल भी गिरा देता हूं तो जिसे ये दोनों चप्पलें मिल जाएंगी, उसके काम आ जाएंगी। यही सोचकर मैंने दूसरी चप्पल भी गिरा दी।'
गांधीजी की ये सोच थी हमारा नुकसान तो हो चुका है, लेकिन क्या किसी और का भला किया जा सकता है।
सीख- हमें भी हमारी सोच ऐसी ही रखनी चाहिए। अगर कहीं हमारा कोई नुकसान हो गया है और उस नुकसान में से किसी दूसरे का लाभ हो सकता है तो वह काम जरूर करना चाहिए।
पुणे शहर के फरगुसन कॉलेज रोड पर इन दिनों 22 साल का एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट एक प्लेकार्ड लेकर खड़ा रहता है। जिस पर लिखा होता है, ‘आप मुझे अपनी स्टोरी बताइए, मैं आपको 10 रुपए दूंगा।’ उसे देखकर वहां से गुजरने वाले लोगों की निगाहें कुछ सेकेंड के लिए उस पर ठहर जाती हैं और कदम खुद-ब-खुद रुक जाते हैं। जब लोग पास जाते हैं, तब उन्हें पूरी कहानी समझ में आती है।
प्लेकार्ड लेकर खड़े रहने वाले इस शख्स का नाम है राज डागवार, जो पुणे के ही PRCT कॉलेज में कम्प्यूटर इंजीनियरिंग फाइनल ईयर का स्टूडेंट है। मूलत: नागपुर से ताल्लुक रखने वाले राज की फैमिली दुबई में रहती है और वो यहां रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों को यह पहल काफी पसंद आ रही है।
राज बताते हैं कि मैं हर दिन शाम 6 बजे से रात 10-11 बजे तक लोगों की कहानियां सुनता हूं।
राज कहते हैं, 'हमारे आसपास ऐसे बहुत से लोग हैं, जो अकेले पड़ चुके हैं। घर में रहकर वह अपनी बात किसी अपने से शेयर नहीं कर पाते हैं और अंदर ही अंदर घुट रहे होते हैं। लॉकडाउन के दौरान हालात और भी बिगड़े हैं। कई लोग अकेलेपन की वजह से डिप्रेशन में चले गए।'
राज कहते हैं, 'हर इंसान अपने दिल की बात कहने के लिए किसी खास शख्स को ढूंढता है। जिससे वे सबकुछ शेयर कर सकें, ताकि मन का बोझ कुछ हल्का हो सके और सही सलाह मिल सके। लेकिन, जरूरी नहीं कि हर कोई इतना लकी हो कि उसके पास अच्छे दोस्त या कोई ऐसा हो, जिसके सामने वे अपना दिल खोलकर बात कर सके।'
इंस्टाग्राम पर ऐसी ही एक पोस्ट देखकर पुणे में की शुरुआत
राज बताते हैं, '4 दिसंबर की रात जब मैं इंस्टाग्राम पर स्क्रॉल कर रहा था, तो मैंने एक पेज पर एक पोस्ट देखी। जहां लिखा था, ‘टेल मी योर स्टोरी, एंड आई विल गिव यू वन डॉलर।’ मुझे ये कॉन्सेप्ट बहुत अच्छा लगा और मैंने उसे शेयर करते हुए यह तय किया कि अगले दिन मैं भी ऐसा ही करूंगा। बस, फिर क्या था, मैंने एक प्लेकार्ड तैयार किया और शाम को स्ट्रीट पर जाकर खड़ा हो गया। मैं शाम 6 बजे से रात 10-11 बजे तक वहां खड़ा रहता हूं लोगों की कहानियां सुनता हूं।'
वो कहते हैं, 'आज रोजाना करीब 15 से 20 लोग मुझे अपनी कहानी बताने के लिए रुकते हैं। कुछ लोग तो सिर्फ ये जानने के लिए रुकते हैं कि मैं ऐसे क्यों खड़ा हूं। कुछ लोगों को तो लगता है कि मैं 10 रुपए मांग रहा हूं और वो मुझे पैसे देकर चले जाते हैं। तब मैं उन्हें आराम से समझाता हूं कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं।'
राज कहते हैं, ‘मैं भी अपनी लाइफ में डिप्रेशन से गुजरा हूं। साल 2019 में मेरी भी हालत ऐसी होती थी कि मैं अपनी बात किसी से शेयर नहीं कर पाता था। मेरी एक कॉलेज टीचर ने मेरे व्यवहार को देखकर समझा कि मैं डिप्रेशन में हूं, तो उन्होंने मेरी मदद की। उन्होंने मुझे एक मनोचिकित्सक के पास भेजा, मैंने उन्हें अपनी पूरी बात बताई और उसके बाद मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ।'
राज कहते हैं कि रोजाना करीब 15 से 20 लोग मुझे अपनी कहानी बताने के लिए रुकते हैं।
वो कहते हैं, 'जब मैंने सड़कों पर जाकर लोगाें की कहानियां सुनना शुरू किया था, तब मैंने अपने पेरेंट्स को इस बारे में नहीं बताया था। लेकिन, कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया और आर्टिकल के जरिए उनको पता लगा, तो उनका काफी अच्छा रिस्पॉन्स रहा।
राज कहते हैं, 'अभी तो प्रिपरेशन लीव चल रही है, इसलिए रोजाना पांच घंटे लोगों की मदद करने के लिए उनकी कहानियां सुनता हूं। आगे चलकर मैं इसे हर वीकेंड करुंगा और मेरे साथ और भी लोग जुड़ेंगे।'
राज का कहना है, 'यह इनिशिएटिव काफी आगे जाने वाला है। अभी तो मैंने सिर्फ पुणे में यह शुरू किया है, लेकिन मुझे देश भर से लाेग इंस्टाग्राम पर मैसेज कर रहे हैं कि वे भी अपने शहर में यह शुरू करना चाहते हैं। मुझे यह जानकर अच्छा लगा कि मेरे इनिशिएटिव के चलते बाकी लोगों में भी मेंटल हेल्थ को लेकर अवेयरनेस आ रही है और वो लोगों की मदद करना चाहते हैं।'
उन्होंने कहा, 'मैं लोगों से बस इतना ही कहना चाहता हूं कि हमारे आसपास बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें वास्तव में मदद की जरूरत है। अगर आपको ऐसा कोई भी व्यक्ति दिखता है जो मेंटल स्ट्रेस या डिप्रेशन से गुजर रहा है, तो प्लीज उससे बात कीजिए। आप बस उसे अपनी लाइफ के पांच मिनट दीजिए और देखिए कैसे आप एक शख्स की लाइफ बदल सकते हैं। करके देखिए, अच्छा लगता है...'
बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के हनन को लेकर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली करीमा बलोच कनाडा में मृत पाई गईं। उनकी हत्या की आशंका जताई जा रही है। पुलिस को करीमा का शव टोरंटो के पास हर्बर फ्रंट में मिला। करीमा के पति हम्माल हैदर और भाई ने शव की पहचान की है। आरोप लग रहे हैं कि पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी ISI ने करीमा की हत्या करवाई है।
करीमा बलोच कौन थीं? करीमा ने मोदी को लेकर क्या कहा था? क्या पहले भी इस तरह से किसी बलोच नेता की मौत हुई है? आइए जानते हैं...
कौन थीं करीमा बलोच?
करीमा बलोच ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट थीं। वे बलूचिस्तान में पाकिस्तान सेना के अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष कर रही थीं। 2016 में पाकिस्तानी सेना के उत्पीड़न से बचकर कनाडा पहुंचीं। करीमा यहां शरणार्थी की तरह रह रही थीं। उन्हें बलूचों की सबसे मजबूत आवाज में से एक माना जाता था।
2016 में बीबीसी ने उन्हें दुनिया की 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक बताया था। वे पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी के लिए संघर्ष कर रही थीं। करीमा बलोच स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन - आजाद की पूर्व चेयरपर्सन भी थीं।
कनाडा में निर्वासन के दौरान भी वे सोशल मीडिया पर पाकिस्तान सरकार और सेना की ओर से बलूचिस्तान में किए जा रहे अत्याचारों पर लिखती रहती थीं। अल्पसंख्यकों, बलोच महिलाओं पर किए जा रहे अत्याचारों को उठाती रहती थीं।
वे बलूचिस्तान में हो रहे अत्याचारों का मामला स्विट्जरलैंड में हुए यूनाइटेड नेशन के सेशन में भी उठा चुकी थीं। उन्हें बलूचिस्तान की सबसे प्रखर महिला एक्टिविस्ट माना जाता था।
मौत के बारे में अब तक क्या सामने आया है?
द बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक करीमा रविवार को आखिरी बार टोरंटो के बे स्ट्रीट और क्वीन्स क्वे वेस्ट एरिया में देखी गई थीं। करीमा के परिवार ने बताया कि उनकी लाश मिली है। परिवार ने उनकी प्राइवेसी बनाए रखने की अपील की है। अपने एक्टिविजम के कारण करीमा अक्सर पाकिस्तान सरकार के निशाने पर रहती थीं। इसी वजह से उन्हें कनाडा में निर्वासित जीवन जीना पड़ रहा था। अब पाकिस्तान पर उनकी हत्या की साजिश रचने के आरोप लग रहे हैं। पाकिस्तानी मूल के लेखक तारेक फतह ने इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ होने का दावा किया है।
Baloch activist #KarimaBaloch escaped Pakistan in 2016 to seek refuge in Canada. Her dead body was found today at Harbourfront.
2016 में रक्षाबंधन पर करीमा बलोच ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना भाई बताया और उनसे बलोच लोगों की आवाज बनने की अपील की। इस पोस्ट के बाद वे भारतीय मीडिया में सुर्खियों में आईं। इस पोस्ट के बाद पाकिस्तान ने करीमा समेत तीन बलोच नेताओं पर केस दर्ज किया था। इन सभी पर पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश और पाकिस्तानी अफसर पर हमला करने का आरोप लगा था।
करीमा से पहले मार्च 2020 में स्वीडन में रह रहे बलोच पत्रकार साजिद हुसैन भी लापता हो गए थे। बाद में उनकी लाश एक नदी के किनारे मिली थी। साजिद के परिवार, दोस्तों और परिचितों ने दावा किया था कि उनकी हत्या हुई है।
पेरिस के जर्नलिस्ट ऑर्गनाइजेशन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने आरोप लगाया था कि साजिद का संदिग्ध रूप से गायब होना और उनकी मौत हो जाना एक साजिश थी। इसे पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी ISI (इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस) और MI (मिलिट्री इंटेलिजेंस ऑफ पाकिस्तान) ने अंजाम दिया था। इसकी वजह पत्रकार के तौर पर उनके काम थे जो पाकिस्तान को खटक रहे थे।
बलूचिस्तान पर पाकिस्तान की नीति क्या है?
पाकिस्तानी सरकार हमेशा से यहां के अकूत प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करती रही है। इसी दोहन और बाहरी आबादी को यहां बसाने की सरकार की कोशिशों के खिलाफ 2003 से यहां संघर्ष अपने चरम पर है। पाकिस्तानी सेना और सरकार यहां मूल बलोच लोगों खासतौर पर अल्पसंख्यकों के साथ अमानवीय रवैया अपनाती है। हजारों बलोच लोग या तो पाकिस्तानी सेना के हाथों मारे गए या लापता हैं। बलोच एक्टिविस्ट्स आरोप लगाते हैं कि यहां पाकिस्तानी सेना ह्यूमन राइट्स का वायलेशन कर रही है। इन्हीं नीतियों के खिलाफ कई बलोच अलगाववादी और चरमपंथी संगठन पिछले दो दशक से बलूचिस्तान में सक्रिय हैं।
चीन का इस इलाके में क्या दखल है?
एशिया और पाकिस्तान में अपना दबदबा बनाने और भारत-अमेरिका से मुकाबले के लिए चीन यहां कई काम कर रहा है। चीन और पाकिस्तान के बीच बन रहे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) में बलूचिस्तान अहम पड़ाव है।
CPEC बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ेगा। इस बंदरगाह को बनाने का काम भी 2002 में चीन ने शुरू किया था। इसे बनाने के लिए चीन से ही इंजीनियर, अधिकारी और मजदूर लाए गए थे। बलोच लोगों को इससे बाहर रखा गया था। यहां की जमीनें भी अधिकारियों ने बलोच लोगों से लेकर भारी मुनाफे में बेच दी। इससे यहां हिंसा शुरू हो गई। 2004 में बलोच अलगाववादियों के हमले में तीन चीनी इंजीनियर मारे गए। हिंसा को दबाने के लिए 2005 में पाकिस्तान को फौज का सहारा लेना पड़ा था।
बलूचिस्तान में अलगाववादी और राजनीतिक दल दोनों ही चीन के इस निवेश का विरोध करते रहे हैं। बलोच अलगाववादियों का कहना है कि चीन यहां अपना उप-निवेश बनाने के लिए आर्थिक परियोजनाएं ला रहा है। चीनी प्रोजेक्ट्स में बलोच लोगों की सहमति नहीं ली जाती।
चीन ने पिछले दो दशक में कई अरबों डॉलर का निवेश यहां किया है, लेकिन इससे बलूचिस्तान के लोगों को कोई फायदा नहीं हुआ। हां, पाकिस्तान सरकार को जरूर काफी कमाई हुई। स्थानीय लोग कहते हैं कि पाकिस्तान सरकार अपने कर्ज उतारने के लिए बलूचिस्तान को चीन के हाथों बेच रही है।
बलूचिस्तान पर भारत का स्टैंड क्या रहा है?
आजादी के बाद से भारत बलूचिस्तान के मुद्दे पर बोलने से बचता था। वह किसी देश के आंतरिक टकराव में दखल देते नहीं दिखना चाहता था। 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त पर अपने भाषण में बलूचिस्तान में चल रहे संघर्ष का जिक्र किया था। हालांकि, बलूचिस्तान में चले रहे संघर्ष को पाकिस्तानी सरकार अक्सर भारत प्रायोजित बताती रहती है।
बलूचिस्तान का इतिहास क्या है?
अंग्रेजों ने अपने शासन के दौरान बलूचिस्तान को चार रियासतों में बांटा था। इनमें तीन- मकरान, लस बेला और खारन आजादी के वक्त पाकिस्तान में मिल गईं। लेकिन कलात के खान यार खान ने अपने को आजाद घोषित कर दिया। 27 मार्च 1948 को पाकिस्तान ने कलात पर कब्जा कर लिया। उसके बाद से ही पाकिस्तान के खिलाफ अलग-अलग दौर में अलग-अलग मुद्दों को लेकर लगातार बलूचिस्तान का पाकिस्तानी सरकार और सेना से संघर्ष चलता रहा है।
बलूचिस्तान आज भी पाकिस्तान का सबसे गरीब और सबसे कम आबादी वाला इलाका है। कई दशकों से यहां अलगाववादी सक्रिय हैं। 2005 में पाकिस्तान ने अलगाववादियों के खिलाफ सैन्य अभियान भी चलाया था। लेकिन, हालात नहीं बदले।
AK-47 दुनिया में शायद सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली रायफल है। दुनियाभर में AK-47 के करीब 10 करोड़ अलग-अलग वर्जन यूज हो चुके हैं। इसे बनाने वाले मिखाइल कलाश्निकोव की आज पुण्यतिथि है। 2013 में आज ही के दिन उनका निधन हुआ था। वो 1919 में सोवियत संघ के कुर्या में पैदा हुए थे। मशीनों से इतना प्यार था कि सेना में टैंक मैकेनिक के तौर में भर्ती हुए। एक और शौक था कविता लिखने का। कलाश्निकोव ने जीवनभर कविताएं लिखीं। उनकी कविताएं की 6 किताबों की शक्ल में भी छपी हैं।
बचपन में ही कलाश्निकोव और उनके परिवार को कुर्या से सर्बिया डिपोर्ट कर दिया गया था। कलाश्निकोव जब सातवीं में पढ़ते थे तो वो करीब एक हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर वापस अपने घर कुर्या आ गए थे। महज 19 साल की उम्र में रूसी सेना में शामिल हो गए।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जून 1941 में हिटलर ने सोवियत संघ पर हमला कर दिया। इस लड़ाई में सोवियत संघ के 88 लाख से ज्यादा सैनिक मारे गए। कलाश्निकोव के टैंक में भी आग लगी। वे बुरी तरह घायल हुए। चोट से रिकवरी के दौरान हथियार बनाने का काम करने लगे। 1947 में महज 28 साल की उम्र में उन्होंने ऑटोमैटिक कलाश्निकोव 47 यानी AK-47 बनाई। ऑटोमैटिक का मतलब स्वचालित और कलाश्निकोव इसे बनाने वाले मिखाइल कलाश्निकोव के नाम पर था। ये बंदूक 1947 में बनाई गई थी इसलिए नाम के अंत में 47 लगा दिया गया।
कहते हैं कि इस रायफल की सबसे बड़ी खासियत इसकी सिंप्लिसिटी है। ये ईजी टू यूज, ईजी टू रिपेयर, ईजी टू मेंटेन रायफल है। इसकी इफेक्टिवनेस इसी से पता चलती है कि फुल ऑटोमैटिक सेटिंग पर इस रायफल से एक मिनट में 600 राउंड फायर किए जा सकते हैं।
उम्र के आखिरी पड़ाव में कलाश्निकोव ने कहा था कि अगर उन्हें दोबारा कुछ बनाने का मौका मिलेगा तो वो इससे कम खतरनाक चीज बनाना चाहेंगे। जैसे किसानों के लिए घास काटने की मशीन। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि आपके बनाए हथियार से हजारों लोगों की जान जाती है। ये सोचकर आपको नींद कैसे आती है तो उन्होंने जवाब दिया, ‘मैं बहुत अच्छे से सोता हूं, धन्यवाद’।
किसानों के मसीहा की कहानी
आज किसान दिवस है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जन्मदिन। वे किसानों के सबसे बड़े नेता कहे जाते हैं। चौधरी चरण सिंह देश के पांचवें प्रधानमंत्री तो बने, लेकिन केवल 23 दिन में ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 1939 में अंग्रेजों के शासन के दौरान जब संयुक्त प्रदेश (मौजूदा उत्तर प्रदेश) में कांग्रेस सरकार बनी, तब चरण सिंह किसानों को सूदखोरों के चंगुल से निकालने के लिए डेप्ट रिडेम्सन बिल लेकर आए। यूपी में मंत्री रहते किसानों के लिए जमींदारी उन्मूलन बिल लाए। केंद्र में मंत्री रहते हुए नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डवलपमेंट यानी नाबार्ड की स्थापना की। चौधरी चरण सिंह को प्रधानमंत्री के तौर पर संसद में बोलने का मौका नहीं मिल सका। कहते हैं किसानों का ये मसीहा अगर संसद में बोलता, उसे कुछ और वक्त मिलता तो किसानों की किस्मत पलट सकती थी।
भारत और दुनिया में 23 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं :
2010: कांग्रेस नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरन का निधन।
2008: सॉफ्टवेयर कम्पनी सत्यम पर विश्व बैंक ने बैन लगाया।
2004: भारत के दसवें प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव का निधन।
2000: भारतीय और पाकिस्तानी सिनेमा में काम करने वाली एक्ट्रेस और गायिका नूरजहां का निधन।
2000: पश्चिम बंगाल की राजधानी कलकत्ता का नाम बदलकर कोलकाता कर दिया गया।
1995: हरियाणा के मंडी डाबवाली के एक स्कूल में कार्यक्रम के दौरान आग लग गई। हादसे में करीब 400 लोगों की मौत हुई।
1968: मौसम संबंधी देश के पहले रॉकेट ‘मेनका’ का सफल प्रक्षेपण।
1922: बीबीसी रेडियो ने रोजाना समाचार प्रसारण शुरू किया।
1899: प्रसिद्ध उपन्यासकार, कहानीकार, क्रान्तिकारी, पत्रकार और संपादक रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म हुआ।
AK-47 दुनिया में शायद सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली रायफल है। दुनियाभर में AK-47 के करीब 10 करोड़ अलग-अलग वर्जन यूज हो चुके हैं। इसे बनाने वाले मिखाइल कलाश्निकोव की आज पुण्यतिथि है। 2013 में आज ही के दिन उनका निधन हुआ था। वो 1919 में सोवियत संघ के कुर्या में पैदा हुए थे। मशीनों से इतना प्यार था कि सेना में टैंक मैकेनिक के तौर में भर्ती हुए। एक और शौक था कविता लिखने का। कलाश्निकोव ने जीवनभर कविताएं लिखीं। उनकी कविताएं की 6 किताबों की शक्ल में भी छपी हैं।
बचपन में ही कलाश्निकोव और उनके परिवार को कुर्या से सर्बिया डिपोर्ट कर दिया गया था। कलाश्निकोव जब सातवीं में पढ़ते थे तो वो करीब एक हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर वापस अपने घर कुर्या आ गए थे। महज 19 साल की उम्र में रूसी सेना में शामिल हो गए।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जून 1941 में हिटलर ने सोवियत संघ पर हमला कर दिया। इस लड़ाई में सोवियत संघ के 88 लाख से ज्यादा सैनिक मारे गए। कलाश्निकोव के टैंक में भी आग लगी। वे बुरी तरह घायल हुए। चोट से रिकवरी के दौरान हथियार बनाने का काम करने लगे। 1947 में महज 28 साल की उम्र में उन्होंने ऑटोमैटिक कलाश्निकोव 47 यानी AK-47 बनाई। ऑटोमैटिक का मतलब स्वचालित और कलाश्निकोव इसे बनाने वाले मिखाइल कलाश्निकोव के नाम पर था। ये बंदूक 1947 में बनाई गई थी इसलिए नाम के अंत में 47 लगा दिया गया।
कहते हैं कि इस रायफल की सबसे बड़ी खासियत इसकी सिंप्लिसिटी है। ये ईजी टू यूज, ईजी टू रिपेयर, ईजी टू मेंटेन रायफल है। इसकी इफेक्टिवनेस इसी से पता चलती है कि फुल ऑटोमैटिक सेटिंग पर इस रायफल से एक मिनट में 600 राउंड फायर किए जा सकते हैं।
उम्र के आखिरी पड़ाव में कलाश्निकोव ने कहा था कि अगर उन्हें दोबारा कुछ बनाने का मौका मिलेगा तो वो इससे कम खतरनाक चीज बनाना चाहेंगे। जैसे किसानों के लिए घास काटने की मशीन। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि आपके बनाए हथियार से हजारों लोगों की जान जाती है। ये सोचकर आपको नींद कैसे आती है तो उन्होंने जवाब दिया, ‘मैं बहुत अच्छे से सोता हूं, धन्यवाद’।
किसानों के मसीहा की कहानी
आज किसान दिवस है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जन्मदिन। वे किसानों के सबसे बड़े नेता कहे जाते हैं। चौधरी चरण सिंह देश के पांचवें प्रधानमंत्री तो बने, लेकिन केवल 23 दिन में ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 1939 में अंग्रेजों के शासन के दौरान जब संयुक्त प्रदेश (मौजूदा उत्तर प्रदेश) में कांग्रेस सरकार बनी, तब चरण सिंह किसानों को सूदखोरों के चंगुल से निकालने के लिए डेप्ट रिडेम्सन बिल लेकर आए। यूपी में मंत्री रहते किसानों के लिए जमींदारी उन्मूलन बिल लाए। केंद्र में मंत्री रहते हुए नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डवलपमेंट यानी नाबार्ड की स्थापना की। चौधरी चरण सिंह को प्रधानमंत्री के तौर पर संसद में बोलने का मौका नहीं मिल सका। कहते हैं किसानों का ये मसीहा अगर संसद में बोलता, उसे कुछ और वक्त मिलता तो किसानों की किस्मत पलट सकती थी।
भारत और दुनिया में 23 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं :
2010: कांग्रेस नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरन का निधन।
2008: सॉफ्टवेयर कम्पनी सत्यम पर विश्व बैंक ने बैन लगाया।
2004: भारत के दसवें प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव का निधन।
2000: भारतीय और पाकिस्तानी सिनेमा में काम करने वाली एक्ट्रेस और गायिका नूरजहां का निधन।
2000: पश्चिम बंगाल की राजधानी कलकत्ता का नाम बदलकर कोलकाता कर दिया गया।
1995: हरियाणा के मंडी डाबवाली के एक स्कूल में कार्यक्रम के दौरान आग लग गई। हादसे में करीब 400 लोगों की मौत हुई।
1968: मौसम संबंधी देश के पहले रॉकेट ‘मेनका’ का सफल प्रक्षेपण।
1922: बीबीसी रेडियो ने रोजाना समाचार प्रसारण शुरू किया।
1899: प्रसिद्ध उपन्यासकार, कहानीकार, क्रान्तिकारी, पत्रकार और संपादक रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म हुआ।
from Dainik Bhaskar /national/news/aaj-ka-itihas-today-history-india-world-23-december-kisan-diwas-chaudhary-charan-singh-anniversary-ak-47-rifle-inventor-mikhail-kalashnikov-128042751.html